Organisation
BRICS
BRICS: बदलती दुनिया में भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
BRICS आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण समूह बन चुका है। शुरुआत में यह केवल कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग का मंच था, लेकिन समय के साथ इसका दायरा व्यापार, विकास, वित्त, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों तक फैल गया है। भारत के लिए BRICS इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसे वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने का अवसर देता है।
BRICS की शुरुआत कैसे हुई?
BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें Brazil, Russia, India और China शामिल थे। वर्ष 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने इन तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए “BRIC” शब्द का इस्तेमाल किया था।
बाद में इन देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ा। वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC Summit आयोजित हुआ। इसके बाद South Africa के शामिल होने से BRIC का नाम BRICS हो गया। South Africa ने 2011 में पहली बार BRICS Summit में पूर्ण सदस्य के रूप में भाग लिया।
BRICS का विस्तार
हाल के वर्षों में BRICS का काफी विस्तार हुआ है। वर्तमान में इसमें 11 सदस्य देश हैं—Brazil, Russia, India, China, South Africa, Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Indonesia।
इस विस्तार के कारण BRICS का वैश्विक महत्व और बढ़ गया है। सदस्य देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे समूह को Global South के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए अधिक प्रभाव मिलता है।
भारत के लिए BRICS का महत्व
भारत BRICS के संस्थापक सदस्यों में से एक है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा महत्व Strategic Autonomy और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने में है।
भारत चाहता है कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़े। संयुक्त राष्ट्र, IMF और World Bank जैसी संस्थाओं में सुधार की मांग भारत लंबे समय से करता रहा है।
BRICS भारत को Brazil, Russia, China और अन्य महत्वपूर्ण देशों के साथ एक ही मंच पर संवाद करने का अवसर देता है। यह भारत की विदेश नीति में Multi-Alignment का अच्छा उदाहरण भी है।
आर्थिक सहयोग और New Development Bank
BRICS का एक महत्वपूर्ण योगदान New Development Bank (NDB) है। इसकी स्थापना 2014 में हुई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में infrastructure तथा sustainable development projects के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा BRICS देश व्यापार, निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता
वर्ष 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। 18वां BRICS Summit 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया।
भारत ने BRICS के माध्यम से Global South की प्राथमिकताओं, innovation, sustainability और बेहतर वैश्विक शासन पर जोर दिया है।
हाल ही में नई दिल्ली में हुए Summit में सदस्य देशों ने New Delhi Declaration को अपनाया। इसमें वैश्विक संघर्षों, व्यापार, ऊर्जा, विकास और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
BRICS के सामने चुनौतियां
BRICS की बढ़ती सदस्य संख्या इसकी ताकत भी है और चुनौती भी। सभी सदस्य देशों के राजनीतिक और आर्थिक हित समान नहीं हैं।
विशेष रूप से भारत और चीन के बीच सीमा तथा रणनीतिक मतभेद हैं। इसके बावजूद दोनों देश BRICS जैसे मंचों पर सहयोग करते हैं।
इसलिए BRICS की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश अपने मतभेदों के बावजूद व्यापार, विकास और वैश्विक सहयोग जैसे साझा मुद्दों पर कितनी प्रभावी सहमति बना पाते हैं।
UPSC के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?
UPSC और State PCS की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए BRICS International Relations और Current Affairs का महत्वपूर्ण विषय है। इसे Global South, multipolar world, strategic autonomy, economic diplomacy और global governance से जोड़कर समझना चाहिए।
BRICS केवल एक संगठन नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक शक्ति-संरचना का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
BRICS भारत को अपनी आर्थिक और कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह BRICS को किसी एक देश या समूह के विरुद्ध मंच बनाने के बजाय व्यावहारिक सहयोग, विकास और Global South की आवाज को मजबूत करने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करे।
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Top IAS Coaching in Chandigarh और Best IAS Coaching in Chandigarh की तैयारी में BRICS जैसे विषयों को केवल याद करने के बजाय International Relations और Current Affairs से जोड़कर समझना जरूरी है।
इसी तरह Top UPSC Coaching in Chandigarh और Best UPSC Coaching in Chandigarh की तैयारी में Global South, India's Foreign Policy और Multipolar World जैसे concepts पर मजबूत पकड़ महत्वपूर्ण है।
State Civil Services aspirants के लिए Top Civil Services Coaching in Chandigarh, Best HCS Coaching in Chandigarh और Top HCS Coaching in Chandigarh जैसे विकल्पों के साथ नियमित Current Affairs preparation सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं PCS aspirants के लिए Best PCS Coaching in Chandigarh के माध्यम से General Studies, Current Affairs और analytical answer writing पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।


